परिचय
बिहार विधानसभा चुनाव 2025 के नतीजों ने राज्य की राजनीति में एक नया इतिहास रच दिया है। 14 नवंबर 2025 को घोषित हुए परिणामों में राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) ने शानदार जीत दर्ज की है, जबकि महागठबंधन को करारी हार का सामना करना पड़ा है। इस ब्लॉग पोस्ट में हम बिहार चुनाव 2025 के सभी महत्वपूर्ण पहलुओं पर विस्तार से चर्चा करेंगे।
चुनाव की मुख्य जानकारी
चुनाव कार्यक्रम
भारत निर्वाचन आयोग ने 6 अक्टूबर 2025 को बिहार विधानसभा चुनाव का कार्यक्रम घोषित किया था। यह चुनाव दो चरणों में संपन्न हुआ:
- पहला चरण: 6 नवंबर 2025 (121 सीटों पर)
- दूसरा चरण: 11 नवंबर 2025 (122 सीटों पर)
- मतगणना: 14 नवंबर 2025
- कुल सीटें: 243
रिकॉर्ड मतदान
बिहार में इस बार का मतदान इतिहास में सबसे अधिक रहा। 67.13% मतदान दर्ज किया गया, जो 1951 के बाद से अब तक का सर्वोच्च स्तर है। पहले चरण में 65.08% और दूसरे चरण में लगभग 69.20% मतदान हुआ।
कुल मतदाताओं की संख्या: 7,43,55,976 (जिसमें 1,63,619 सर्विस वोटर शामिल)
चुनाव परिणाम 2025: पूर्ण विवरण
NDA की ऐतिहासिक जीत
राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) ने 202 सीटें जीतकर रिकॉर्ड बहुमत हासिल किया। यह बिहार के इतिहास में NDA की सबसे बड़ी जीत है।
NDA की पार्टीवार सीटें:
- भाजपा (BJP): 89 सीटें – पहली बार सबसे बड़ी पार्टी के रूप में उभरी
- जनता दल (यूनाइटेड) JD(U): 85 सीटें – 2010 के बाद सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन
- लोक जनशक्ति पार्टी (राम विलास) LJP(RV): 19 सीटें
- हिंदुस्तानी आवाम मोर्चा (HAM): 5 सीटें
महागठबंधन की हार
महागठबंधन को केवल 35 सीटें मिलीं, जो उम्मीद से बहुत कम रहा।
महागठबंधन की पार्टीवार सीटें:
- राष्ट्रीय जनता दल (RJD): 25 सीटें – 2010 के बाद पहली बार तीसरे स्थान पर
- भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस: 6 सीटें (61 सीटों पर चुनाव लड़ी थी)
- अन्य छोटी पार्टियां: 4 सीटें
अन्य पार्टियों का प्रदर्शन
- AIMIM: 5 सीटें
- निर्दलीय: 10 उम्मीदवार जीते
- जन सुराज पार्टी (प्रशांत किशोर): 0 सीटें – एक भी सीट नहीं जीत सकी
वोट शेयर का विश्लेषण
चुनाव परिणामों में वोट शेयर का विश्लेषण बेहद दिलचस्प रहा:
- RJD: 23% (सबसे अधिक वोट शेयर)
- BJP: 20.07% (2020 के 19.46% से वृद्धि)
- JD(U): महत्वपूर्ण वोट शेयर
- कांग्रेस: गिरावट
यह दिलचस्प है कि RJD को सबसे अधिक वोट मिले, लेकिन सीटों में वह तीसरे स्थान पर रही। इससे NDA के बेहतर बूथ-स्तरीय समन्वय और रणनीति का पता चलता है।
प्रमुख विजेता और हारने वाले
विशेष जीत
- नीतीश कुमार: 10वीं बार मुख्यमंत्री बनने जा रहे हैं – एक रिकॉर्ड
- तेजस्वी यादव: रघोपुर सीट से 14,532 वोटों से जीते
- अनंत सिंह: मोकामा से जेल में रहते हुए 28,991 वोटों से जीत दर्ज की
- मैथिली ठाकुर: अलीनगर से जीतकर 25 साल की उम्र में बिहार की सबसे कम उम्र की विधायक बनीं
- विजय कुमार सिन्हा: लखीसराय से 24,940 वोटों से जीते
प्रमुख हार
- तेज प्रताप यादव: महुआ सीट से तीसरे स्थान पर रहकर हार गए
- खेसारी लाल यादव: छपरा से BJP की छोटी कुमारी से 7,600 वोटों से हार गए
- प्रशांत किशोर की जन सुराज पार्टी: किसी भी सीट पर जीत नहीं मिली
चुनाव के मुख्य मुद्दे
बेरोजगारी और पलायन
बिहार में युवा बेरोजगारी एक प्रमुख मुद्दा रहा। राज्य के युवा काम की तलाश में अन्य राज्यों में पलायन करने को मजबूर हैं। दोनों गठबंधनों ने रोजगार सृजन के बड़े वादे किए थे।
जाति जनगणना
सभी प्रमुख पार्टियों ने नई जाति जनगणना और “सामाजिक न्याय” उपायों का समर्थन किया। यह बिहार की जाति-आधारित असमानताओं को दूर करने की व्यापक मांग को दर्शाता है।
भ्रष्टाचार और शासन
विपक्ष ने नीतीश कुमार की सरकार पर “भ्रष्टाचार को संस्थागत बनाने” का आरोप लगाया। सत्ताधारी गठबंधन ने RJD के अतीत (“जंगल राज”) की आलोचना करते हुए अपने कल्याणकारी रिकॉर्ड को उजागर किया।
मतदाता सूची विवाद
एक बड़ा विवाद विशेष गहन संशोधन (SIR) को लेकर रहा। विपक्ष ने आरोप लगाया कि 60 लाख से अधिक नामों को मतदाता सूची से हटाया गया। चुनाव आयोग ने कहा कि ये उन लोगों के नाम थे जो मृत, पलायन कर चुके थे या डुप्लिकेट थे।
2020 बनाम 2025: तुलनात्मक विश्लेषण
2020 के परिणाम:
- NDA: 125 सीटें (BJP-74, JD(U)-43, VIP-4, HAM(S)-4)
- महागठबंधन: 110 सीटें (RJD-75, कांग्रेस-19, CPI(ML)-12, CPI-2, CPM-2)
2025 के परिणाम:
- NDA: 202 सीटें (BJP-89, JD(U)-85, LJP(RV)-19, HAM-5)
- महागठबंधन: 35 सीटें (RJD-25, कांग्रेस-6, अन्य-4)
मुख्य बदलाव:
- NDA में 77 सीटों की बढ़ोतरी
- महागठबंधन में 75 सीटों की गिरावट
- BJP पहली बार सबसे बड़ी पार्टी के रूप में उभरी
- JD(U) ने 43 से 85 सीटों तक शानदार वापसी की
चुनाव प्रचार के प्रमुख चेहरे
NDA की ओर से:
- प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी: आक्रामक प्रचार अभियान
- मुख्यमंत्री नीतीश कुमार: हेलीकॉप्टर उड़ान न भर पाने पर 600 किलोमीटर रोड शो
- गृह मंत्री अमित शाह: रणनीतिक योजना और समन्वय
- चिराग पासवान: युवा चेहरे के रूप में
महागठबंधन की ओर से:
- तेजस्वी यादव: मुख्यमंत्री पद के उम्मीदवार
- राहुल गांधी: कांग्रेस के लिए प्रचार
- कन्हैया कुमार: पदयात्रा के माध्यम से युवा मुद्दों पर ध्यान
Exit Poll बनाम वास्तविक परिणाम
अधिकांश Exit Poll ने NDA की जीत का सही अनुमान लगाया था:
Exit Poll अनुमान:
- NDA: 130-167 सीटें
- महागठबंधन: 70-100 सीटें
- जन सुराज: 0-5 सीटें
वास्तविक परिणाम:
- NDA: 202 सीटें (अनुमान से अधिक)
- महागठबंधन: 35 सीटें (अनुमान से बहुत कम)
- जन सुराज: 0 सीटें
विपक्ष के आरोप और प्रतिक्रियाएं/ बिहार विधानसभा चुनाव 2025
चुनाव परिणामों के बाद विपक्ष ने कई आरोप लगाए:
“वोट चोरी” के आरोप
कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने आरोप लगाया कि यह “विशाल पैमाने पर वोट चोरी” है, जिसमें PM मोदी, गृह मंत्री अमित शाह और चुनाव आयोग “मास्टरमाइंड” हैं। कांग्रेस ने 128 निर्वाचन क्षेत्रों में धांधली का दावा किया।
राहुल गांधी की प्रतिक्रिया
राहुल गांधी ने बिहार चुनाव को “शुरुआत से ही अनुचित” बताया। उन्होंने कहा कि पार्टी अपने प्रदर्शन की समीक्षा करेगी और “संविधान और लोकतंत्र की रक्षा के लिए लड़ाई जारी रखेगी।”
NDA की प्रतिक्रिया
केंद्रीय मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत ने कहा कि चुनाव परिणामों ने दिखा दिया कि मतदाता खोखले वादों या योजनाओं में नहीं फंसते। उन्होंने “वोट चोरी के आरोपों” को जनता को गुमराह करने का प्रयास बताया।
PM मोदी का संबोधन
जीत के बाद PM नरेंद्र मोदी ने BJP मुख्यालय में कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हुए कहा:
“जय छठी मैया! यह प्रचंड जीत, अटूट विश्वास… बिहार के लोगों ने बिल्कुल गर्दा उड़ा दिया है। बिहार में RJD को सांप सूंघ गया है, और जैसा मैंने बिहार चुनाव के दौरान कहा था, दोनों दलों के बीच संघर्ष जल्द ही सामने आएगा।”
उन्होंने यह भी कहा कि “आज की जीत एक नई यात्रा की शुरुआत है। बिहार ने हम पर जो विश्वास जताया है, उसने हमारे कंधों पर और भी बड़ी जिम्मेदारी डाल दी है।”
चुनाव परिणाम का विश्लेषण
NDA की जीत के कारण
- नीतीश कुमार का अनुभव: 10वीं बार मुख्यमंत्री बनने वाले नीतीश कुमार की छवि
- PM मोदी का जनाधार: प्रधानमंत्री की लोकप्रियता और प्रचार
- बेहतर बूथ प्रबंधन: NDA का मजबूत जमीनी संगठन
- गठबंधन एकता: BJP और JD(U) के बीच बेहतर समन्वय
- विकास का एजेंडा: “जंगल राज बनाम विकासवाद” का प्रभावी नारा
- महिला मतदाताओं का समर्थन: कल्याणकारी योजनाओं का प्रभाव
महागठबंधन की हार के कारण
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- आंतरिक कलह: गठबंधन में सीट बंटवारे को लेकर विवाद
- नेतृत्व का संकट: तेजस्वी यादव के नेतृत्व पर सवाल
- कांग्रेस का खराब प्रदर्शन: 61 सीटों पर लड़कर सिर्फ 6 जीतना
- RJD के “जंगल राज” की छवि: अतीत का बोझ
- प्रशांत किशोर का फैक्टर: कई सीटों पर वोट कटना
- जमीनी संगठन की कमी: बूथ स्तर पर कमजोर उपस्थिति
प्रमुख सीटों का विवरण
रघोपुर (यादव गढ़)
तेजस्वी यादव ने अपनी पारंपरिक सीट रघोपुर से 14,532 वोटों से जीत दर्ज की, लेकिन मार्जिन पिछली बार से कम रहा।
मोकामा (अनंत सिंह की सीट)
जेल में रहते हुए भी JD(U) के अनंत सिंह ने मोकामा से लगभग 29,000 वोटों से शानदार जीत हासिल की।
छपरा (खेसारी लाल यादव बनाम छोटी कुमारी)
भोजपुरी सुपरस्टार खेसारी लाल यादव (RJD) की हार BJP की छोटी कुमारी से 7,600 वोटों के मार्जिन से हुई।
अलीनगर (मैथिली ठाकुर की जीत)
25 वर्षीय गायिका मैथिली ठाकुर ने अलीनगर से 11,730 वोटों से जीत दर्ज की और बिहार की सबसे युवा विधायक बनीं। यह पहली बार है जब BJP ने इस सीट पर जीत दर्ज की।
महुआ (तेज प्रताप यादव की हार)
लालू यादव के बड़े बेटे तेज प्रताप यादव महुआ सीट से तीसरे स्थान पर रहकर हार गए। उन्हें 35,703 वोट मिले।
भविष्य की संभावनाएं
नीतीश कुमार का 10वां कार्यकाल
नीतीश कुमार रिकॉर्ड 10वीं बार बिहार के मुख्यमंत्री बनेंगे। यह उनके लंबे राजनीतिक करियर का शिखर है। हालांकि, इस बार BJP सबसे बड़ी पार्टी है, जो आने वाले समय में समीकरणों को प्रभावित कर सकता है।
महागठबंधन का भविष्य
इस करारी हार के बाद महागठबंधन के सामने अस्तित्व का संकट है। RJD और कांग्रेस दोनों को अपनी रणनीति पर पुनर्विचार करने की जरूरत है। तेजस्वी यादव के नेतृत्व पर भी सवाल उठ सकते हैं।
BJP का बढ़ता प्रभाव
पहली बार बिहार में सबसे बड़ी पार्टी बनकर BJP ने अपनी स्थिति मजबूत की है। आने वाले समय में राज्य की राजनीति में इसका महत्वपूर्ण प्रभाव होगा।
प्रशांत किशोर की जन सुराज
प्रशांत किशोर की जन सुराज पार्टी का एक भी सीट न जीत पाना एक बड़ा झटका है। हालांकि, कुछ सीटों पर इसकी उपस्थिति ने “वोट कटवा” की भूमिका निभाई।
निष्कर्ष
बिहार विधानसभा चुनाव 2025 के परिणाम राज्य की राजनीति में एक निर्णायक मोड़ साबित हुए हैं। NDA की ऐतिहासिक जीत ने नीतीश कुमार को फिर से “बिहार के सियासी बादशाह” के रूप में स्थापित किया है। रिकॉर्ड 67.13% मतदान ने लोकतांत्रिक प्रक्रिया में जनता के विश्वास को दर्शाया।
महागठबंधन की करारी हार ने विपक्ष के सामने गंभीर चुनौतियां खड़ी कर दी हैं। RJD और कांग्रेस दोनों को अपनी रणनीति और संगठन को मजबूत करने की आवश्यकता है।
BJP का पहली बार सबसे बड़ी पार्टी के रूप में उभरना बिहार की राजनीति में एक महत्वपूर्ण बदलाव है। आने वाले पांच वर्षों में यह देखना दिलचस्प होगा कि NDA सरकार बेरोजगारी, पलायन, और विकास जैसे महत्वपूर्ण मुद्दों को कैसे संबोधित करती है।
मुख्य बिंदु याद रखें:
- NDA: 202 सीटें (BJP-89, JD(U)-85)
- महागठबंधन: 35 सीटें (RJD-25, कांग्रेस-6)
- रिकॉर्ड मतदान: 67.13%
- नीतीश कुमार: 10वीं बार मुख्यमंत्री
- BJP: पहली बार बिहार में सबसे बड़ी पार्टी
यह चुनाव परिणाम न केवल बिहार बल्कि राष्ट्रीय राजनीति पर भी दूरगामी प्रभाव डालेगा। 2024 लोकसभा चुनाव के बाद यह NDA के लिए एक महत्वपूर्ण जीत है।
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