“भगवान ने बड़ी फुर्सत से बनाया होगा इसे” – दिलीप कुमार
प्रस्तावना
Dharmendra death reason 24 नवंबर 2025 को भारतीय सिनेमा ने अपना एक महानायक खो दिया। 89 वर्ष की आयु में धर्मेंद्र जी का निधन हो गया, लेकिन उन्होंने जो विरासत छोड़ी है, वह सदियों तक भारतीय सिनेमा को प्रेरित करती रहेगी। 65 साल के लंबे करियर में 300 से अधिक फिल्मों में काम करने वाले धर्मेंद्र जी सिर्फ एक अभिनेता नहीं थे – वे एक युग, एक भावना और करोड़ों दिलों की धड़कन थे।
शुरुआती जीवन: एक साधारण शुरुआत से असाधारण सफर
गांव से मुंबई तक का सफर
धर्मेंद्र का जन्म 8 दिसंबर 1935 को पंजाब के लुधियाना जिले के नसराली गांव में धरम सिंह देओल के रूप में हुआ था। उनके पिता केवल किशन सिंह देओल एक स्कूल के प्रधानाध्यापक थे। साहनेवाल गांव में बचपन बिताने वाले धर्मेंद्र ने अपनी शुरुआती शिक्षा लालटोन कलां के सरकारी सीनियर सेकेंडरी स्कूल से प्राप्त की। 1952 में उन्होंने फगवाड़ा के रामगढ़िया कॉलेज से इंटरमीडिएट की पढ़ाई पूरी की।
सिनेमा का जुनून
बचपन से ही धर्मेंद्र को फिल्मों से गहरा लगाव था। वे अभिनेत्री सुरैया के बहुत बड़े प्रशंसक थे और उनकी फिल्म ‘दिल्लगी’ (1949) देखने के लिए कई मील पैदल चलकर सिनेमा हॉल तक जाते थे – यह फिल्म उन्होंने 40 से अधिक बार देखी थी।
Filmfare प्रतिभा खोज
एक दिन अपनी मां के सुझाव पर, धर्मेंद्र ने फिल्मफेयर की ‘न्यू टैलेंट हंट’ प्रतियोगिता में अपनी फोटो भेजी। यह बिमल रॉय और गुरु दत्त द्वारा आयोजित प्रतियोगिता थी। धर्मेंद्र ने यह प्रतियोगिता जीती और पहली बार मुंबई आए – सपनों की नगरी में कदम रखा।
फिल्मी करियर: संघर्ष से सुपरस्टारडम तक
पहली फिल्म और शुरुआती संघर्ष (1960-1965)
1960 में अर्जुन हिंगोरानी की फिल्म ‘दिल भी तेरा हम भी तेरे’ से धर्मेंद्र ने अपने करियर की शुरुआत की। शुरुआत में उन्हें छोटे-छोटे रोमांटिक रोल मिले। युवा, सुदर्शन और प्रतिभाशाली धर्मेंद्र ने धीरे-धीरे अपनी जगह बनानी शुरू की।
सुपरस्टार का उदय (1966-1975)
फूल और पत्थर (1966): यह फिल्म धर्मेंद्र के करियर का टर्निंग पॉइंट बनी। यह उनकी पहली एकल एक्शन फिल्म थी और साल की सबसे बड़ी हिट साबित हुई। इस फिल्म के लिए उन्हें पहली बार फिल्मफेयर बेस्ट एक्टर के लिए नामांकित किया गया। मीना कुमारी के साथ उनकी जोड़ी ने दर्शकों का दिल जीत लिया।
बंदिनी (1963): बिमल रॉय की इस फिल्म में नूतन के साथ उनकी अभिनय क्षमता को सराहा गया।
सत्यकाम (1969): हृषिकेश मुखर्जी की इस फिल्म में धर्मेंद्र ने सत्यप्रिय आचार्य का किरदार निभाया – एक ऐसा व्यक्ति जो अपने सिद्धांतों पर कभी समझौता नहीं करता। यह फिल्म राष्ट्रीय पुरस्कार विजेता बनी और धर्मेंद्र ने इसे अपने करियर की सबसे संतोषजनक फिल्म माना। हृषिकेश मुखर्जी ने धर्मेंद्र को अपना पसंदीदा अभिनेता बताते हुए कहा था, “मेरा मतलब सिर्फ उनकी अभिनय प्रतिभा से नहीं था, बल्कि इंसान से भी था।”
शोले (1975): यह फिल्म न सिर्फ धर्मेंद्र के करियर की बल्कि भारतीय सिनेमा की सबसे महान फिल्मों में से एक है। वीरू के किरदार में धर्मेंद्र ने अपनी कॉमिक टाइमिंग, रोमांटिक अंदाज और एक्शन – तीनों में अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन किया। अमिताभ बच्चन के जय के साथ उनकी जोड़ी भारतीय सिनेमा की सबसे प्रसिद्ध दोस्ती बन गई।
यह फिल्म 5 साल तक मुंबई के मिनर्वा थिएटर में लगातार चलती रही और 100 से अधिक थिएटरों में रजत जयंती मनाई। अगर आज के मुद्रास्फीति के हिसाब से देखें तो इस फिल्म की कमाई 1493.5 करोड़ रुपये होगी।
चुपके चुपके (1975): हृषिकेश मुखर्जी की इस कॉमेडी फिल्म में धर्मेंद्र ने डॉ. परिमल त्रिपाठी का किरदार निभाया। एक प्रोफेसर जो ड्राइवर बनकर अपने ससुरालवालों को चकमा देता है। यह फिल्म आज भी कॉमेडी का बेहतरीन नमूना मानी जाती है।
एक्शन हीरो का दौर (1976-1990)
मेरा गांव मेरा देश (1971): इस फिल्म से धर्मेंद्र एक्शन हीरो के रूप में स्थापित हुए। उन्हें बेस्ट एक्टर के लिए फिल्मफेयर नामांकन मिला।
सीता और गीता (1972): हेमा मालिनी के साथ इस फिल्म में उनकी जोड़ी ने बॉक्स ऑफिस पर धमाल मचा दिया।
यादों की बारात (1973), जुगनू (1973), धर्म वीर (1977), द बर्निंग ट्रेन (1980): ये सभी फिल्में धर्मेंद्र की एक्शन छवि को मजबूत करती रहीं।
हुकुमत (1987): यह फिल्म उस साल की सबसे बड़ी हिट बनी और धर्मेंद्र को एक्शन सुपरस्टार के रूप में स्थापित किया।
बदलाव का समय (1990-2000)
1990 के दशक में जब शाहरुख खान, आमिर खान और सलमान खान जैसे युवा चेहरे आए, तो धर्मेंद्र ने एक समझदारी भरा कदम उठाया। उन्होंने लो-बजट की एक्शन फिल्में करनी शुरू कीं जैसे ‘लोहा’, ‘मेरी जंग का ऐलान’, ‘जल्लाद नंबर 1’। हालांकि ये फिल्में कलात्मक रूप से उतनी सफल नहीं थीं, लेकिन इन्होंने उन्हें आर्थिक रूप से मजबूत रखा और अपने पुराने प्रशंसकों के बीच लोकप्रिय बनाए रखा। more detail for dharmendra sir wikipedia
1997 में उन्हें फिल्मफेयर लाइफटाइम अचीवमेंट अवॉर्ड से सम्मानित किया गया। दिलीप कुमार और सायरा बानो ने यह पुरस्कार देते हुए धर्मेंद्र की खूबसूरती और प्रतिभा की प्रशंसा की।
पुनरागमन और नई पीढ़ी (2000-2025)
प्यार किया तो डरना क्या (1998): इस फिल्म से धर्मेंद्र ने ए-ग्रेड फिल्मों में वापसी की।
लाइफ इन ए मेट्रो (2007): इस फिल्म से धर्मेंद्र ने साबित किया कि वे नई पीढ़ी की कहानियों में भी प्रासंगिक हैं।
अपने (2007): इस फिल्म में पहली बार धर्मेंद्र अपने दोनों बेटों सनी देओल और बॉबी देओल के साथ नजर आए। यह फिल्म 38.81 करोड़ की कमाई के साथ उनकी आधुनिक युग की सबसे बड़ी हिट बनी।
यमला पगला दीवाना (2011, 2013, 2018): इस सीरीज में फिर से धर्मेंद्र ने अपने बेटों के साथ काम किया और अपनी कॉमेडी टाइमिंग का प्रदर्शन किया।
रॉकी और रानी की प्रेम कहानी (2023): 84 साल की उम्र में धर्मेंद्र ने इस फिल्म में एक रोमांटिक रोल किया, जिसमें उन्होंने शबाना आजमी के साथ एक लिपलॉक सीन भी किया। यह साहस और जिंदादिली का उदाहरण था।
इक्कीस (2025): यह फिल्म धर्मेंद्र की अंतिम फिल्म होगी जो उनके निधन के बाद रिलीज होगी।
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व्यक्तिगत जीवन: प्यार, परिवार और रिश्ते
पहली शादी
1954 में मात्र 19 साल की उम्र में धर्मेंद्र ने प्रकाश कौर से शादी की। इस शादी से उनके चार बच्चे हुए – दो बेटे सनी देओल और बॉबी देओल (दोनों सफल अभिनेता) और दो बेटियां विजयता और अजीता।
हेमा मालिनी से प्रेम
शोले की शूटिंग के दौरान धर्मेंद्र को हेमा मालिनी से प्यार हो गया। उन्होंने अपने रोमांटिक सीन के दौरान लाइट बॉयज को रिश्वत देकर लाइट खराब करवाई ताकि ज्यादा रीटेक हो सकें और वे हेमा के साथ ज्यादा समय बिता सकें।
1980 में उन्होंने हेमा मालिनी से शादी की। अपनी पहली पत्नी को तलाक न देने के लिए उन्होंने 1979 में इस्लाम धर्म अपनाया और अपना नाम दिलावर खान रख लिया। हेमा से उनकी दो बेटियां हुईं – ईशा देओल (अभिनेत्री) और अहाना देओल (डांसर)।
प्रोड्यूसर के रूप में
धर्मेंद्र ने विजयता फिल्म्स नामक प्रोडक्शन हाउस शुरू किया। इस बैनर से उन्होंने अपने दोनों बेटों को लॉन्च किया:
- बेताब (1983): सनी देओल की डेब्यू फिल्म
- बरसात (1995): बॉबी देओल की डेब्यू फिल्म
सनी की फिल्म ‘घायल’ ने नेशनल अवॉर्ड भी जीता।
राजनीतिक सफर
2004 से 2009 तक धर्मेंद्र भारतीय जनता पार्टी (BJP) की ओर से राजस्थान के बीकानेर से सांसद रहे।
धर्मेंद्र की विशेषताएं: क्या बनाता था उन्हें खास
1. बहुमुखी प्रतिभा
धर्मेंद्र एक ऐसे अभिनेता थे जो हर तरह की भूमिका में सहज थे:
- रोमांटिक हीरो: आई मिलन की बेला, बंदिनी
- एक्शन हीरो: शोले, मेरा गांव मेरा देश, हुकुमत
- कॉमेडी: चुपके चुपके, गजब, यमला पगला दीवाना
- चरित्र भूमिका: सत्यकाम, लाइफ इन ए मेट्रो
2. समय के साथ बदलने की क्षमता
धर्मेंद्र ने हर दशक में खुद को बदला:
- 1960s: रोमांटिक हीरो
- 1970-80s: एक्शन सुपरस्टार
- 1990s: बी-ग्रेड एक्शन फिल्में
- 2000s: कैरेक्टर रोल्स
- 2010-2025: आधुनिक फिल्मों में प्रासंगिक भूमिकाएं
3. सहज व्यक्तित्व
ऑन-स्क्रीन और ऑफ-स्क्रीन दोनों जगह धर्मेंद्र अपने दोस्ताना और गर्मजोशी भरे व्यक्तित्व के लिए जाने जाते थे। सोशल मीडिया पर उनके खेतों में घूमने, बासी रोटी खाने और पुराने दोस्तों की यादों में रोने वाले वीडियो उनकी सहजता को दर्शाते थे।
4. शारीरिक फिटनेस
धर्मेंद्र को “ही-मैन ऑफ बॉलीवुड” कहा जाता था। उनकी कद-काठी और फिटनेस ने उन्हें एक्शन सीन के लिए आदर्श बनाया। 1983 में उन्होंने बैडमिंटन खेलते समय सांस फूलने के बाद धूम्रपान छोड़ दिया। वे शाकाहारी बन गए और योग और साइकिलिंग को अपनी दिनचर्या में शामिल किया।
5. दिलीप कुमार की प्रशंसा
दिग्गज अभिनेता दिलीप कुमार ने एक बार कहा था, “जब भी मैं ईश्वर से मिलूंगा, मैं उनसे बस एक शिकायत करूंगा – आपने मुझे धर्मेंद्र जितना खूबसूरत क्यों नहीं बनाया?”
पुरस्कार और सम्मान
- फिल्मफेयर लाइफटाइम अचीवमेंट अवॉर्ड (1997)
- पद्म भूषण (2012): भारत का तीसरा सबसे बड़ा नागरिक सम्मान
- ज़ी सिने लाइफटाइम अचीवमेंट अवॉर्ड (2005)
- पुणे इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल लाइफटाइम अचीवमेंट अवॉर्ड (2007)
- IIFA लाइफटाइम अचीवमेंट अवॉर्ड (2007)
हालांकि धर्मेंद्र को 4 बार फिल्मफेयर बेस्ट एक्टर के लिए नामांकित किया गया, लेकिन वे यह पुरस्कार कभी नहीं जीत पाए। पुरस्कार स्वीकार करते समय उन्होंने इस बात का जिक्र भावुक होकर किया था।
प्रेरणादायक पहलू: हम धर्मेंद्र से क्या सीख सकते हैं
1. सपनों को पूरा करने का साहस
एक छोटे से पंजाबी गांव का लड़का, जो फिल्में देखने के लिए मीलों पैदल चलता था, वह बॉलीवुड का सबसे बड़ा सुपरस्टार बन गया। यह दर्शाता है कि अगर आप में जुनून और मेहनत है, तो कोई भी सपना असंभव नहीं है।
2. विफलताओं से सीखना
1990s में जब उनका करियर ढलान पर था, उन्होंने हार नहीं मानी। उन्होंने अपने बेटों को लॉन्च किया, बी-ग्रेड फिल्में कीं और खुद को आर्थिक रूप से मजबूत रखा। 2000s में उन्होंने फिर से शानदार वापसी की।
3. समय के साथ बदलना
धर्मेंद्र ने हर दशक में खुद को बदला। उन्होंने नई पीढ़ी के साथ तालमेल बिठाया और 89 साल की उम्र तक काम करते रहे। यह सिखाता है कि लचीलापन और सीखने की क्षमता सफलता की कुंजी है।
4. स्वास्थ्य का ध्यान
धर्मेंद्र ने धूम्रपान छोड़ा, शाकाहारी बने और नियमित व्यायाम किया। यह दर्शाता है कि स्वास्थ्य सबसे बड़ी पूंजी है।
5. रिश्तों को महत्व देना
अपने परिवार, खासकर अपने बेटों के साथ उनका रिश्ता बेहद खास था। उन्होंने अपने बच्चों को फिल्म इंडस्ट्री में स्थापित करने में मदद की और हमेशा उनके साथ काम करने को तरजीह दी।
6. विनम्रता और सहजता
इतने बड़े स्टार होने के बावजूद धर्मेंद्र जमीन से जुड़े रहे। खेतों में घूमना, सोशल मीडिया पर अपने प्रशंसकों से बात करना – यह सब उनकी सहजता दर्शाता है।
भारतीय सिनेमा में धर्मेंद्र की विरासत
बॉक्स ऑफिस रिकॉर्ड
धर्मेंद्र ने हिंदी सिनेमा में सबसे अधिक हिट फिल्मों का रिकॉर्ड बनाया। 300 से अधिक फिल्मों में काम करने वाले वे एकमात्र अभिनेता थे जिन्होंने 6 दशकों तक लगातार सफलता देखी।
कैमिस्ट्री और जोड़ियां
- हेमा मालिनी के साथ: 40 से अधिक फिल्मों में साथ काम किया
- अमिताभ बच्चन के साथ: भारतीय सिनेमा की सबसे प्रसिद्ध दोस्ती
- मीना कुमारी के साथ: 8 सफल फिल्में
एक्शन सिनेमा का विकास
धर्मेंद्र ने एक्शन सिनेमा को भारत में लोकप्रिय बनाया। उनकी फिल्मों ने एक्शन और रोमांस का संतुलन बनाया।
परिवारिक परंपरा
उनके बेटे सनी और बॉबी देओल, पोते करण देओल और भतीजे अभय देओल – सभी फिल्म इंडस्ट्री में हैं।
अंतिम विदाई
24 नवंबर 2025 को जब धर्मेंद्र जी ने अंतिम सांस ली, तो पूरा देश रो पड़ा। सायरा बानो ने रोते हुए कहा, “वह फैमिली जैसे थे और बेहद अच्छे और खूबसूरत इंसान थे।”
अमिताभ बच्चन, आमिर खान, शाहरुख खान, करण जौहर समेत पूरी फिल्म इंडस्ट्री ने उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि दी।
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निष्कर्ष: एक अमर विरासत
धर्मेंद्र सिर्फ एक अभिनेता नहीं थे – वे एक संस्था थे, एक प्रेरणा थे। उन्होंने दिखाया कि मेहनत, प्रतिभा और लगातार खुद को बदलने की क्षमता से कोई भी व्यक्ति शिखर तक पहुंच सकता है।
उनकी फिल्में आने वाली पीढ़ियों को प्रेरित करती रहेंगी। उनका व्यक्तित्व, उनकी जिंदादिली, उनकी सहजता – यह सब हमेशा याद रखा जाएगा।
“जब तक सिनेमा है, तब तक धर्मेंद्र हैं। जब तक दर्शक हैं, तब तक वीरू है। जब तक दोस्ती है, तब तक जय-वीरू की कहानी है।”
धर्मेंद्र जी को हमारा सलाम। उनकी आत्मा को शांति मिले।
यह लेख बॉलीवुड के महानायक धर्मेंद्र को एक सच्ची और भावपूर्ण श्रद्धांजलि है। उनकी विरासत सदैव जीवित रहेगी।
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